Monday, January 2, 2012

राधिका से जब ये नैना लागे रे... !!!

राधिका से जब ये नैना लागे रे...
कान्हा अब सारी-२ रैना जागे रे...

बिसुरी सुध और बंसी गुमाई...
बन बन फिरे होए जग में हंसाई...
बेकल जी अब ये चैना मांगे रे...
राधिका से जब ये नैना लागे रे...

राधिका से जब ये नैना लागे रे...
कान्हा अब सारी-२ रैना जागे रे...

माखन भूला और ग्वाले भुलाए...
भोली सुरतिया जी कैसे भुलाये...
काँटा पिरतिया का ये पैना लागे रे...
राधिका से जब ये नैना लागे रे...

राधिका से जब ये नैना लागे रे...
कान्हा अब सारी-२ रैना जागे रे...

भावार्थ...

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