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Saturday, February 14, 2015

इश्क़ की दास्ताँ है प्यारी

इश्क़ की दास्ताँ है प्यारे
अपनी अपनी जुबान है प्यारे

हम जमाने से इंतकाम लेंगे
इक हंसी दमियां है पप्यारे

तू नहीं मैं हूँ मैं नहीं तू है
अब कुछ ऐसा गुमान है प्यारे

रख कदम फूंक फूंक कर नादाँ
जर्रे जर्रे में जान है प्यारे

जिगर मुरादाबादी





Tuesday, December 6, 2011

तेरी ख़ुशी से अगर गम भी ख़ुशी न हुए...

तेरी ख़ुशी से अगर गम भी ख़ुशी न हुए...
ये जिंदगी मोहब्बत की जिंदगी न हुए...

खयाल यार सलामत तुझे खुदा रखे...
तेरे बगैर घर में कभी रौशनी न हुए...

सबा ये उनसे हमारा पयाम कह देना...
गए हो जब से सुबह शाम एक न हुए...

गए थे हम भी जिगर जलवागाह-ए-गाना में...
वो पूछते ही रहे हम से बात ही न हुई...


जिगर मुरादाबादी !!!

कितना हसीन गुनाह किये जा रहा हूँ मैं...

दिल में किसी के राह किये जा रहा हूँ में...
कितना हसीन गुनाह किये जा रहा हूँ मैं...

मुझ से लगे है इश्क की अज़मत को चार चाँद....
खुद हुस्न को गवाह किये जा रहा हूँ मैं..

गुलशन परश्त हूँ मुझे गुल ही नहीं अज़ीज़...
काँटों से भी निभाह किये जा रहा हूँ मैं...

मुझसे अदा हुआ है जिगर जुस्तजू का हक...
पर जर्रे को गवाह किये जा रहा हूँ मैं...

जिगर मुरादाबादी !!!


दिल मगर कम किसी से मिलता है...

आदमी आदमी से मिलता है...
दिल मगर कम किसी से मिलता है..

आज क्या बात है की फूलों का
रंग तेरी हंसी से मिलता है...

भूल जाता हूँ में सितम उसके...
वो कुछ इस सादगी से मिलता है...

मिल के भी जो नहीं मिलता...
टूट कर दिल उसी से मिलता है...

आदमी आदमी से मिलता है...

दिल मगर कम किसी से मिलता है..


जिगर मुरादाबादी !!!

ये इश्क नहीं आसान बस इतना समझ लीजे...

एक लफ्ज़ मोहब्बत का अदना ये फ़साना है...
सिमटे तो दिल-इ-आशिक फैले तो ज़माना है...

आँखों में नमी सी है चुप चुप से वो बैठे हैं...
नाज़ुक सी निगाहों में नाज़ुक सा फ़साना है...

ये इश्क नहीं आसान बस इतना समझ लीजे...
एक आग का दरिया है और डूब के जाना है...

दिल संग-ए-मलामत का हर चन्द निशाना है...
दिल फिर भी मेरा दिल है दिल ही तो जमाना है...

आंसू तो बहुत से हैं आँखों में जिगर लेकिन...
गिर जाए वो मोती है रह जाए सो  दाना है...

जिगर मुरादाबादी !!!

Tuesday, November 22, 2011

मुद्दत में वो फिर ताज़ा मुलाकात का आलम...

मुद्दत में वो फिर ताज़ा मुलाकात का आलम...
खामोश अदाओं में वो जज्बात का आलम...

अल्लाह रे वो शिद्दत-ए- जज्बात का आलम..
कुछ कहते  हुए उनकी  हर बात का आलम...

वो नज़रों ही नज़रों में सलावत की दुनिया...
वो आँखों ही आँखों में जवावात का आलम...

मुद्दत में वो फिर ताज़ा मुलाकात का आलम...

खामोश अदाओं में वो जज्बात का आलम...


जिगर मुरादाबादी !!!