Showing posts with label नुसरत साहब. Show all posts
Showing posts with label नुसरत साहब. Show all posts

Thursday, August 12, 2010

सोचता हूँ की वो कितने मासूम थे !!!

सोचता हूँ की वो कितने मासूम थे...
क्या से क्या हो गए देखते देखते...

मैंने पत्थर से जिनको बनाया सनम....
वो खुदा हो गए देखते देखते...

हश्र है वह्सहते दिल की आवारगी....
हमसे पूछो दिल की दीवानगी..
वो पता पूछते थे किसी का कभी....
लापता हो गए देखते देखते...

हमसे ये सोच कर कोई वादा करो...
एक वादे पे उमरें गुजर जायेंगी...
ये है दुनिया यहाँ कितने अहले-वफ़ा...
बेवफा हो गए देखते देखते...

दिन छुप गया सूरज का कहीं नाम नहीं है...
वादा शिकन अब तेरी अभी शाम नहीं है...
कल से बेकल हूँ जरा सा मुझे कल आये...
रोज का इंतज़ार कौन करे...
आपका इंतज़ार कौन करे...

गेर की बात तस्लीम क्या कीजिये...
अब तो ख़ुद पे भी हमको भरोसा नहीं...
अपना साया समझते थे जिनको...
वो जुदा हो गए देखते देखते...

...अनजान " शायर"