Saturday, October 24, 2009

दूधिया खाब !!!



ख्यालों के उड़नखटोले पे बैठकर...
तुम जब करीब आती हो...
पंख बन जाते हैं मेरे खाब...
तुझको लिए ये दूधिया खाब
फ़िर तैरते रहते हैं...
रात के समंदर में...
चांदनी के हिलोरों पे...
तुझको महसूस करते...
आगोश का गिलाफ भरते...
दूशिया खाब पंख से उड़ते रहते हैं...

...भावार्थ



No comments: