Sunday, September 8, 2013

दर्द के आभास को भांपता सा है

वो बच्चा अँधेरे से झांकता सा है
हर एक  रिश्ते से काँपता सा है
मासूमियत अभी पनपी भी नहीं
दर्द के आभास को भांपता सा है

हर शख्स उसे सहेली सा लगे
हर लफ्ज़ उसे पहेली सा लगे
नहीं जानती  हैवानियत क्या है
सितम भी उसे अठ्केली सा लगे

जो भी बड़े करते ऐसा हैं क्यों करते हैं
बहला के फुसला के हमें क्यों करते हैं
खूबसूरत है जिंदगी माँ कहती है
उसे ये ऐसा करके गन्दा क्यों करते हैं

भावार्थ

Sunday, September 1, 2013

ओ कान्हा !!!

मेरा करदे बेडा पार ओ कान्हा
मुझे भाये नहीं संसार ओ कान्हा

पांच भूत से बनी ये काया
इस काया में बसी है माया
माया ने ये जाल बिछाया

मुझे माया से कर दे पार ओ कान्हा
मेरा करदे बेडा पार ओ कान्हा

जित देखूं तित तुझको पाऊँ
हिरदे बिच में तुझको बसाऊँ
तुझको बिसरूं तो मर जाऊं

ऐसा करदे तू उद्धार ओ कन्हा
मुझे भाये नहीं संसार ओ कान्हा

एक जोत से सब दीपक जलते
एक नाम से सब जीव है पलते
एक सांचे में सब तन ये ढलते

मुझे खुद में कर इकसार ओ कान्हा
मुझे भाये नहीं संसार ओ कान्हा

अहम् के मारे क्रोध है उपजा
क्रोध के मारे विष है उपजा
विष के मारे दैत्य है उपजा

इस दैत्य को दे तू मार ओ कान्हा
मुझे भाये नहीं संसार ओ कान्हा

मेरा करदे बेडा पार ओ कान्हा
मुझे भाये नहीं संसार ओ कान्हा

भावार्थ 
२८ अगस्त २०१३ , जन्माष्टमी, बुधवार, रोहिणी नक्षत्र ( जीवन परिवर्तन की गुहार)