Wednesday, December 31, 2008

कहते हैं नया साल नई ज़िन्दगी जैसा.....

आज फिर चाँद सूरज को निगल गया ,
आज का दिन भी बस यूँ ही निकल गया ,
कहते हैं नया साल नई ज़िन्दगी जैसा,
लेकिन क्या आज अपना कुछ भी बदल गया ?

आज भी रात खवाबों में तुम ही तो थे ,
आज भी सब गुलाबों में तुम ही तो थे ,
आज भी चाँदनी में में बैठी तो थी ,
आज भी ठंडी आँहों से दिल जल गया ,
कहते हैं नया साल नई ज़िन्दगी जैसा
लेकिन क्या आज कुछ भी बदल गया ?

आज भी ठण्ड में मैं सिमटती तो हूँ ,
आज भी चुपके चुपके सिसकती तो हूँ ,
आज भी तेरी तस्वीर आंखों में है ,
आज भी मेरा जैसा मेरा कल गया ,
कहते हैं नया साल नई ज़िन्दगी जैसा
लेकिन क्या आज कुछ भी बदल गया ।

में तुझसे बिछड़ के मरी तो नही ,
और रोई भी में हर घड़ी तो नही ,
आज भी तेरी यदून से जिंदा तो हूँ ,
आज फिर दिल मेरा यूँ ही संभल गया ,
कहते हैं नया साल नई ज़िन्दगी जैसा ............................

Tuesday, December 30, 2008

बे-इन्तेआह तन्हाई का मौसम जब आया...!!!

बेइन्तेआह तन्हाई का मौसम जब आया...
दिन अधियारा और रात सर्द हो गयीं ..
आँखें हसीन मेरी जुदाई से जर्द हो गयीं...
खुशी एक एक कर सारी दर्द हो गयीं...

बेइन्तेआह तन्हाई का मौसम जब आया...
तुमसे मिलने की तमन्ना और बढ़ गई...
याद तेरी हर एक जेहन में मेरे गढ़ गई...
दिल से उठी कसक आँखों में चढ़ गई...

बेइन्तेआह तन्हाई का मौसम जब आया...
सिलवटे बिस्तर की चुभने लगी...
आगोश में तेरी कमी खलने लगी...
हसरतें तुझे पाने को मचलने लगी...

बेइन्तेआह तन्हाई का मौसम जब आया...
लगा मेरी जिंदगी तेरी एक अमानत है...
तेरा एहसास मेरे दिल में सलामत है...
तेरी मोहब्बत भी मुझे एक इनायत है...

बेइन्तेआह तन्हाई का मौसम जब आया...
लम्हे भी सदियों से लगने लगे ...
अक्स सारे तेरे सांचे से बनने लगे...
बादल मेरी आँखों से बरसने लगे...

बेइन्तेआह तन्हाई का मौसम जब आया...

भावार्थ...