Friday, February 29, 2008

कुछ ख़ास बनने की चाहत थी बस आम बन गया हूँ !!!

कुछ ख़ास बनने की चाहत थी बस आम बन गया हूँ।
आब-ओ-ताब की चाहत में एक घुबार सा बन गया हूँ।

ये ख्वाइश तो दिल-ऐ-नादा की बस एक जिद सी है।
आसमा के अरमान में उमीदों का कफस बन गया हूँ।

न जाने कैसे याद रखेगी दुनिया मुझे इंतकाल के बाद।
कहानी की चाहत थी एक मुख्तसर मिसरा बन गया हूँ।

बुलंदी की खलिश के जला गई मुझे मेरी रूह तक मौला।
बा-कमाल बनने की चाहत थी एक बे-चेहरा बन गया हूँ।

मेरे उसूल थे जो मेरे वजूद की मशाल बन के जिए।
इंक़लाब की चाहत थी मुझे बस एक मजार बन गया हूँ।

भावार्थ ...

URDU-HINDI

आब-ओ-ताब: शान शौकत , घुबार: धूल, कफस : कैद, मुख्तसर: छोटा सा, मिसरा: वाक्य, खलिश: जलन, बा-कमाल: महान, बे-चेहरा: अनजान, इंकलाब: क्रांति, मजार: कब्र

Wednesday, February 27, 2008

मौला मुझको बख्श इस मोहब्बत-ऐ-हयात के तोहफे से !!!

में थमा थमा हूँ उन रहो पे जिनपर में चल रहा हूँ।
बुझा रहा हूँ जिस आग को उसीमें ख़ुद जल रहा हूँ।

ये हो न हो तेरे प्यार का ही मिला कोई अजाब शाकी ।
तू बिछुड़ रही है मुझसे और में तुझसे मिल रहा हूँ ।

तेरा
ये दर्दे-हिज्र रात भर रुलाता है मुझे खून के आँसू ।
वोही घाव फ़ुट पड़ते हैं मेरे जिनको मैं रोज सिल रहा हूँ।

यही सिला मिलता है एकतरफा मोहब्बत अमीरों से करने का।
जिया उसी लौ से उनकी जिसमें में मोम सा पिघल रहा हूँ।

मौला मुझको बख्श इस मोहब्बत-ऐ-हयात के तोहफे से।
जो तार-ऐ-नफस हैं मेरा में उसी की सासों में घुल रहा हूँ।

भावार्थ ...