Saturday, August 11, 2012

मैं फिर भी हार गया...

तुरुप का इक्का था पास मेरे...
मैं फिर भी हार गया...
हर एक हथियार था पास मेरे ...
मैं फिर भी हार गया...

मोहब्बत में बसा था मेरे दर्द का जहाँ 
हर एक खंजर पे मिला अपनों का निशाँ...
करके टुकड़े दिल के हज़ार मेरे...
मैं फिर भी हार गया...

मेरे उजालों में छुपे अँधेरे कितने ...
गम के सागर में डूबे किनारे कितने...
छुप छुप कर बहाए दिल ने आंसू मेरे...
मैं फिर भी हार गया...

भावार्थ...

 







Thursday, August 9, 2012

मैं इस उम्मीद पे डूबा की तू बचा लेगा ...

मैं इस उम्मीद पे डूबा की तू बचा लेगा ...
इससे बढ़ कर तू मेरा इम्तेहान क्या लेगा...

में बुझ गया तो हमेशा को बुझ ही जाऊँगा ...
कोई चराग नहीं हूँ जो फिर जला लेगा...

अब उसके बाद मेरा इम्तेहान क्या लेगा...

कलेजा चाहिए दुश्मन से दुश्मनी के लिए...
जो बे अमल हो वो बदला किसी से क्या लेगा...

अब उसके बाद मेरा इम्तेहान क्या लेगा...

में उसका हो नहीं सकता बता न देना उसे...
लकीर हाथ की अपनी वो सब जला लेगा...

अब उसके बाद मेरा इम्तेहान क्या लेगा...

हज़ार तोड़ के आ जाऊं उससे रिश्ता वसीम ...
मैं जानता हूँ वो जब चाहेगा बुला लेगा...

वसीम बरेलवी...