Thursday, February 28, 2013

कुछ और बात है तेरे नज़र आने से

कुछ और बात है तेरे नज़र आने से
कुछ और बात है तेरे नज़र आने से

गम शुदा है यु तो जर्रा जर्रा
कुछ और बात है तेरे मुस्कुराने से
कुछ और बात है तेरे आने से

बुझ गया वफ़ा का अलाव भी
कुछ और बात है तेरे इश्क निभाने से
कुछ और बात है तेरे नज़र आने से


कुछ और बात है तेरे नकार आने से
कुछ और बात है तेरे नज़र आने से

भावार्थ

Thursday, December 6, 2012

जिस्म की खायिश लिए जिस्म फिरते हैं

जिस्म की खायिश लिए जिस्म फिरते हैं
इक बदहवासी सी लिए होश फिरते हैं

ताल्लुकात जो न दुनिया को दिखाई दिए
अंगारे ऐसे ही लिए राख के गुबार फिरते हैं

सुहाग का सिदूर लाली कब की खो चूका
लत-ओ-नशा लिए यहाँ जिस्म फिरते हैं

तब्दील हम न हुए ये जमाना हुआ भाव
आरजू मौत की इश्क में हम लिए फिरते हैं

जिस्म की खायिश लिए जिस्म फिरते हैं
इक बदहवासी सी लिए होश फिरते हैं



भावार्थ