Thursday, April 15, 2010

तेरा चेहरा !!!


जन्नत का ख़याल जब भी मेरे दिल में आया...
तेरा चेहरा ही जेहने मैं मेरे बस तैरता आया...

मेरी रुकी जिंदगी को रास्ता दे कर ...
मेरे दर्द को आगोश मैं ख़ुद के लेकर ...

हर एक खाब तुने मेरा अपने दिल में सजाया...
जन्नत का ख्याल जब भी मेरे दिल में आया...
तेरा चेहरा.....

कुछ एक और रंग कोरे कागज़ पे भर कर...
बिखरी शख्शियत का मसीहा बन कर...

तेरा हाथ जब मेरे हाथ में मेरे हमसफ़र आया...
तेरा चेहरा ही जेहने मैं मेरे बस तैरता आया...
जन्नत का ख्याल ...

...भावार्थ

Wednesday, April 14, 2010

सिक्के !!!


गुल्लक रीती करो री लाडो...
"देहात" के सिक्के अब चलत नाही हैं...

"शहर"के नोट की बरसात है इतनी....
लोहे को अब कोई पूछत नाही हैं...

हर एक सिक्का याद थी रिश्ते की...
चोकलेट मिलत है सिक्का कोई देवत नाही हैं....

एक रुपये मैं भर भर पेट थे खाते...
अब सेकड़ो से भी कुछ होवत नाही है...

जब जब रूठे सिक्के थे मनाते...
अब उस प्यार से कोई मनावत नाही है...

स्कूल थे जाते तो हर रोज एक सिक्का...
अब उस ख़ुशी को कोई जीवत नाही है...

गुल्लक रीती करो री लाडो...
"देहात" के सिक्के अब चलत नाही है...

...भावार्थ