एहसास का सौदा है...
जज्बात की कीमत है...
दौलत की नुमाईश में...
हर चीज़ इजारत है...
हर खाब है चाँदी का...
हर आरजू सोना है...
सदियों से ये औरत....
मर्द का खिलौना है...
जिस्मो की जवानी तक...
मजबूर मोहब्बत है...
दौलत की नुमाईश में...
हर चीज़ इजारत है...
मतलब की हर यारी...
रिश्ते हैं अदाकारी...
रंगीन मकामो पे...
हर शख्स है व्यापारी...
मक्कार इनायत है...
अय्याश शरारत है...
दौलत की दुनिया में...
हर चीज़ इजारत है...
वादों ने रुलाया है...
चाहत ने सताया है...
जो दुःख है वो अपना है...
जो सुख है वो पराया है...
जीना ही मुसीबत है...
जीना ही जरूरत है...
दौलत की नुमाईश में ...
हर चीज़ इजारत है...
निदा फाजली !!!
एहसासों के कारवां कुछ अल्फाजो पे सिमेटने चला हूँ। हर दर्द, हर खुशी, हर खाब को कुछ हर्फ़ में बदलने चला हूँ। न जाने कौन सी हसरत है इस मुन्तजिर भावार्थ को।अनकहे अनगिनत अरमानो को अपनी कलम से लिखने चला हूँ.....
Monday, December 14, 2009
Wednesday, December 2, 2009
इकरार !!!
बूँद और सेहरा की तड़प लिए ...
ये लौ आज फ़िर दिए में जली...
नज़रे मेरी पयाम-ऐ-इश्क लिए...
उसकी निगाहों के दरमियाँ चली...
टूक भर निहारा, दर्द न हुआ गवारा...
थाम लिया आगोश ने जकड के...
मनो बुत टूटने ही वाली हो...
ख्यालों के झरोखे से हसरत...
उसके आगोश में डूबने ही वाली हो..
परदे और झीने होते गए...
साये एक एक कर खोते गए...
दो रूह और रात की तन्हाई ...
हाथ में हाथ लिए बैठे रहे...
देखते रहे एक दूजे को....
...भावार्थ
ये लौ आज फ़िर दिए में जली...
नज़रे मेरी पयाम-ऐ-इश्क लिए...
उसकी निगाहों के दरमियाँ चली...
टूक भर निहारा, दर्द न हुआ गवारा...
थाम लिया आगोश ने जकड के...
मनो बुत टूटने ही वाली हो...
ख्यालों के झरोखे से हसरत...
उसके आगोश में डूबने ही वाली हो..
परदे और झीने होते गए...
साये एक एक कर खोते गए...
दो रूह और रात की तन्हाई ...
हाथ में हाथ लिए बैठे रहे...
देखते रहे एक दूजे को....
...भावार्थ
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