Friday, June 8, 2012

सदी से इंतज़ार था जिसका वो पल में गुज़र गया...

सदी से इंतज़ार था जिसका वो पल में गुज़र गया...
जेहें का उफनता दरिया एक  लम्हे में उतर गया...

आँखों ने रोका, इशारो ने  समझाया बहुत जिसे...
बड़ा शातिर था  अजनबी  वो दिल में उतर गया...

सांस से सांस बोलती रही गूंगे की तरह लम्हे को...
न जाने अल्फाज बुनने का वो हुनर किधर गया...

सदी से इंतज़ार था जिसका वो पल में गुज़र गया...
जेहें का उफनता दरिया एक लम्हे में उतर गया...

भावार्थ...





3 comments:

संजय भास्कर said...

बहुत ही सुंदर .... एक एक पंक्तियों ने मन को छू लिया ...

Jolly said...

very touching..liked it!!!

Jolly said...

very touching..liked it!!!