Friday, March 30, 2012

अशरार !!!

अशरार !!!

किसी को वफ़ा किसी को मोहब्बत तो किसी को जिस्म मिला...
एक नाजनीन से हे हर एक आशिक को  अलग तिलिस्म मिला...

आतिश जो कहा इश्क को तो गुबार से घबराना कैसा...
डूब ही गए जब दरिया में तो तैर कर फिर जाना कैसा...
आगाज़ से अंजाम तक मोहब्बत एक पहेली है भावार्थ...
जिंदगी उलझ जाए जिसमें उसे उम्र भर सुलझाना कैसा...


अदाओं के खंजर से, नजाकत के जादू से यहाँ कोई न बचा..
तुझे बाँधने को फितरत-ए-आदम मौला ने क्या क्या न रचा..

भावार्थ...

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