Monday, November 7, 2011

उनकी आँखों में !!!

उनकी आँखों में जब नमी देखी...
हुस्न के चार सू गमी देखी...

कौन सी बात वो छुपाये हैं..
आने जाने में अब कमी देखी...

उनकी आँखों में जब नमी देखी...
हुस्न के चार सू गमी  देखी...

बेसबब जब वो मुस्कुराने लगे...
अब के कुछ बात बनी सी देखी...

उनकी आँखों में जब नमी देखी...
हुस्न के चार सू गमी  देखी...

रुके रोशन पे इस कदर साए...
फूल पर धूल सी जमी देखी...

हुस्न के चार सू गमी देखी...
उनकी आँखों में जब नमी देखी...

हजरत !!!









1 comment:

संजय भास्कर said...

दर्द ने शब्दों में बह कर नज़्म का रूप ले लिया है ... मार्मिक रचना